बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में गूंजा विरोध, BT एक्ट 1949 को असंवैधानिक बताते हुए की गई मांग
By रवि आर्य,
Published: march 06, 2025, 04:58 PM
गोंदिया, 6 मार्च (): बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण और पंडों के कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन तेज हो रहा है। इसी क्रम में गोंदिया के बौद्ध समाज ने भी गुरुवार को आंबेडकर चौक पर धरना प्रदर्शन किया और BT एक्ट 1949 को रद्द करने तथा महाबोधि मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की।
BT एक्ट 1949 को बताया असंवैधानिक
धरने का नेतृत्व कर रहे “बोधगया महाबोधि महाविहार मुक्ति क्रांति समिति, गोंदिया” के सदस्यों ने कहा कि बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (BT एक्ट) पूरी तरह असंवैधानिक है। उनका कहना है कि बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल का प्रशासन ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं के संयुक्त हाथों में है, जो बौद्ध समाज के लिए अन्यायपूर्ण है।
महात्मा गांधी ने दिया था आश्वासन, लेकिन अब तक नहीं हुआ मुक्त
बौद्ध समाज के आंदोलनकारियों ने यह भी याद दिलाया कि भारत की स्वतंत्रता से पहले महात्मा गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए वादा किया था कि आजादी के बाद महाबोधि महाविहार को बौद्धों को सौंप दिया जाएगा। लेकिन आज़ादी के बाद दशकों तक कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों की सरकारें आने के बावजूद इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ।
अब बौद्ध समाज ने इस मुक्ति संग्राम को तेज करने का संकल्प लिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब विदेशों में जाते हैं तो कहते हैं कि वे भगवान बुद्ध की भूमि से आए हैं, लेकिन देश में ही बुद्ध के इस ऐतिहासिक स्थल का पूर्ण अधिकार बौद्धों को नहीं दिया गया है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
गोंदिया में हुए इस आंदोलन के दौरान कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा गया। इसमें BT एक्ट 1949 को तत्काल रद्द करने और महाबोधि महाविहार का पूरा नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग की गई।
“महाबोधि महाविहार की मुक्ति ही मेरा जीवन संघर्ष” – भदंत श्रद्धा बोधि
बौद्ध भिक्षु भदंत श्रद्धा बोधि ने इस मौके पर कहा कि “राम मंदिर या तिरुपति देव संस्थान की प्रबंध समितियों में कोई भी बौद्ध सदस्य नहीं है, लेकिन महाबोधि महाविहार के प्रबंधन में हिंदू ब्राह्मणों को जगह दी गई है।” उन्होंने आगे कहा कि “जो लोग बुद्ध के विचारों को पूरी तरह से नहीं मानते, उन्हें इस पवित्र स्थल का प्रबंधन सौंपना अनुचित है।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “महाबोधि महाविहार की मुक्ति ही मेरा जीवन संघर्ष है, और विरासत के वजूद को बचाने के लिए अब हम पीछे नहीं हटेंगे।”
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आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
बोधगया में पहले से ही इस मुद्दे पर बौद्ध भिक्षुओं और संगठनों द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है, जिसे अब देश के अन्य हिस्सों से भी समर्थन मिलने लगा है। गोंदिया का यह प्रदर्शन इस आंदोलन को और बल देने वाला साबित हो सकता है।
क्या सरकार इस मांग पर ध्यान देगी, या आंदोलन और तेज होगा? यह देखने वाली बात होगी।











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