By MUMBAI BUREAU, Newsfirst24.in
Published: February 18, 2025, 04:11 PM
Maharashtra Politics: Conflict between Fadnavis-Shinde is at its peak, they are avoiding even facing each other
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। दोनों एक-दूसरे की अनदेखी कर रहे हैं। यहां तक की दोनों ही एक-दूसरे का सामना करने से भी बच रहे हैं। यहां तक की एक- दूसरे की मीटिंग में जाने से भी बच रहे हैं। महायुति सरकार के भीतर लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो यह संकेत दे रही हैं कि भाजपा और शिंदे गुट के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। इसी तरह दोनों ही पार्टी के कार्यकर्तोओं में भी यह टकराव देखा जा रहा है। इस टकाराव की शुरुआत चुनाव जीतने के बाद सीएम पद को लेकर हुई थी जो कभी समय के साथ बढ़ती गई। अब इसका असर सरकार पर भी दिख रहा है। यहां पढ़िए कैसे बढ़ रहा है टकराव-
फडणवीस की बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक में एकनाथ शिंदे को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें शिरकत नहीं की। इसके दो दिन बाद शिंदे खुद नासिक पहुंचे और कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर अपनी अलग समीक्षा बैठक कर डाली। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या महायुति सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है?
रायगढ़ और नासिक के प्रभारी मंत्री पद पर टकराव
नासिक और रायगढ़ जिले के संरक्षक मंत्री पद को लेकर भी विवाद जारी है। शिंदे गुट के मंत्री दादा भुसे नासिक के संरक्षक मंत्री बनने के लिए इच्छुक हैं, जबकि भाजपा की ओर से मंत्री गिरीश महाजन इस पद के लिए जोर लगा रहे हैं। इससे पहले जब गिरीश महाजन ने नासिक में बैठक बुलाई थी, तब दादा भुसे उसमें नहीं पहुंचे थे।
शिंदे का अलग चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ
महायुति सरकार में मतभेद की एक और वजह चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ की स्थापना भी बनी है। राज्य में पहले से ही मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद एकनाथ शिंदे ने अलग से चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ बना दिया, जिसे उनके करीबी मंगेश चिवटे संचालित कर रहे हैं। शिंदे के इस कदम को फडणवीस की कार्यशैली में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
ठाकरे गुट से बढ़ती फडणवीस की नजदीकियां?
हाल ही में शिवसेना (ठाकरे गुट) के कई नेता, आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे, देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर चुके हैं। भाजपा और ठाकरे गुट के बीच इन मुलाकातों ने यह अटकलें तेज कर दी हैं कि कहीं भाजपा और शिंदे गुट के बीच दरार तो नहीं बढ़ रही?
शिंदे की सफाई, लेकिन क्या मतभेद खत्म?
एकनाथ शिंदे ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार में कोई कोल्ड वॉर नहीं चल रहा है, सब ठंडा-ठंडा कूल-कूल है। उन्होंने कहा कि महायुति में किसी भी तरह का विवाद नहीं है और वे नाराज नहीं हैं।
निकाय चुनाव से पहले टकराव बढ़ेगा?
मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे बड़े नगर निगम चुनाव नजदीक हैं, जहां भाजपा और शिंदे गुट को एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना है। लेकिन हालिया घटनाक्रम यह इशारा कर रहे हैं कि गठबंधन के भीतर खींचतान जारी है। अब देखना यह होगा कि चुनावों से पहले फडणवीस और शिंदे के बीच यह मतभेद और बढ़ता है या भाजपा नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने में सफल होता है।
यहां से शुरू हुई विवाद की जड़
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी:
चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस का नाम प्रमुखता से सामने आया, क्योंकि BJP ने 132 सीटें जीती थीं। हालांकि, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता एकनाथ शिंदे, जिनकी पार्टी ने 57 सीटें हासिल कीं, ने भी मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी जताई। शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने सार्वजनिक रूप से कहा कि एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए, क्योंकि उनकी “लाड़ली बहिण योजना” ने महायुति की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शपथ ग्रहण और पदों का बंटवारा:
लंबी चर्चाओं और बैठकों के बाद, 5 दिसंबर 2024 को देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।
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गृह मंत्रालय को लेकर तनाव:
शपथ ग्रहण के बाद, मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहते थे। इस मुद्दे पर फडणवीस और शिंदे के बीच मतभेद उभरकर सामने आए।
मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा‘ को लेकर विवाद:
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भी, देवेंद्र फडणवीस आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में स्थानांतरित नहीं हुए। शिवसेना सांसद संजय राउत ने दावा किया कि फडणवीस अंधविश्वास के कारण ‘वर्षा’ में नहीं जा रहे हैं। फडणवीस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे अपनी बेटी की बोर्ड परीक्षाओं के बाद वहां शिफ्ट होंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एकनाथ शिंदे के बंगला खाली करने के बाद ही वे ‘वर्षा’ में जाएंगे।












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