By Ramesh Solanki, Newsfirst24.in
Published: February 03 , 2025, 03:55 PM
निजामाबाद/आसिफाबाद,
तेलंगाना के निजामाबाद जिले के वेलपुर मंडल के पचला नादुकुडा गांव में जातिगत भेदभाव का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बेटे को अपने पिता के शव को छूने के कारण जाति पंचायत ने समाज से बहिष्कृत कर दिया। आधुनिक युग में भी कुछ गांवों में दकियानूसी रीति-रिवाजों के नाम पर अमानवीय परंपराएं कायम हैं।
तीन साल से बहिष्कृत था परिवार
गांव के ध्वजवाहक लिंगन्ना के दो बेटे थे, जिनमें संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद था। मामला जाति पंचायत के पास पहुंचा, लेकिन लिंगन्ना ने उनके फैसले का विरोध किया। इसके बाद पंचायत ने लिंगन्ना को समाज से बहिष्कृत कर दिया। तीन वर्षों तक लिंगन्ना और उनके छोटे बेटे लिंगेश्वर को समाज में तिरस्कार झेलना पड़ा। पंचायत ने उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया और दबाव बनाकर 1.5 लाख रुपये तक की वसूली की।
मृत्यु के बाद भी न मिला सम्मान
रविवार दोपहर लिंगन्ना की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आर्मूर स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। छोटे बेटे लिंगेश्वर ने जब पिता का शव घर लाने और अंतिम संस्कार करने की कोशिश की, तो जाति पंचायत ने रोक लगा दी। पंचायत के प्रतिनिधियों ने जातिगत नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बहिष्कृत व्यक्ति का शव समाज के किसी भी रीति-रिवाज के तहत घर नहीं लाया जा सकता।
पुलिस से लगाई न्याय की गुहार
लाचार लिंगेश्वर ने वेलपुर पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उसने अपनी मां सयाम्मा के साथ मिलकर जाति पंचायत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उसने कहा कि जिन लोगों ने उसके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार किया और उसे प्रताड़ित किया, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
जाति पंचायत की तानाशाही पर रोष
इस घटना ने जिले में जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जाति पंचायतें असंवैधानिक रूप से लाखों रुपये की वसूली कर रही हैं और सामाजिक दबाव बनाकर अमानवीय फैसले सुना रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की त्रासदी न झेलनी पड़े।
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