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ऐसे चल रही है महाकुंभ की तैयारी, पंडालों ने आकार लेना शुरू किया, साधुओं ने पहुंचना शुरू किया

ऐसे चल रही है महाकुंभ की तैयारी
  • पिछली बार मेला क्षेत्र 3200 हेक्टेयर था, इस बार ये इलाक़ा 4000 हेक्टेयर रहेगा
  • कुंभ के लिए एक नया जिला महाकुंभनगर बनाया
  • मेले के दौरान उत्तर प्रदेश में ज़िलों की संख्या 75 से बढ़कर 76 हो जाती है

By प्रेम उपाध्यय, Newsfirst24.in

Published: December25 , 2024, 08:44PM

ऐसे चल रही है महाकुंभ की तैयारी

प्रयागराज। प्रयागराज में 13 जनवरी से से शुरू होने वाले कुंभ की तैयारी जोरों पर चल रही है। यहां आने वाले साधुओं के आखाड़ों की जगह पहले ही तय हो चुकी है। उनके पांडालों को लगाना शुरू हो चुका है। पांडालों को धार्मिक आधार पर अलग-अलग रूप देने की तैयार की जा रही है। इस मेले के दौरान उत्तर प्रदेश में ज़िलों की संख्या 75 से बढ़कर 76 हो जाती है।

चंद महीनों के लिए बन जाता है एक नया शहर

मेला संगम तट पर एक विशाल क्षेत्र में आयोजित होता है। यह एक तरह का नया शहर बसाने जैसा काम होता है। जो चंद महीनों के लिए होता है। यहां पानी से लेकर ड्रेनेज तक उसी तरह सुविधाओं का इंतजाम करना होता है जैसे किसी नए शहर को बसाने के लिए करना होता है। यह भारी मशक्कत का काम है। इतने बड़े क्षेत्र में जुटने वाले करोड़ों लोगों के लिए चंद महीनों में सुविधाएँ उपलब्ध कराना, सुरक्षा देना और संगम में स्नान को सुगम और सहज बनाना एक बड़ी चुनौती है। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार कुंभ मेला क्षेत्र को एक ज़िले का दर्जा देती है।

नए जिले के रूप में महाकुंभनगरका नाम दिया गया है

ऐसे चल रही है महाकुंभ की तैयारी

किसी नए ज़िले की तरह मेले के स्थान को जहां साधु रुकेंगे। उसे महाकुंभनगर का नाम दिया गया है। इसका भी एक कलेक्टर होता है। जिसे ‘मेलाधिकारी’ कहा जाता है। महाकुंभनगर के मेलाधिकारी आईएएस अधिकारी विजय किरन आनंद हैं।

इस बार मेले का क्षेत्र बढ़ाया गया है। पिछली बार मेला क्षेत्र 3200 हेक्टेयर था, इस बार ये इलाक़ा 4000 हेक्टेयर रहेगा।

मेलाधिकारियों के मुताबिक़, जल निगम मेला क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए कुल 1250 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछा रहा है। विद्युत विभाग 67000 एलईडी लाइटें लगा रहा है। और इसके लिए सब-स्टेशन बनाया जा रहा है। एक लाख पचास हज़ार शौचालय बनाए जा रहे हैं, जिनकी सफ़ाई के लिए 10000 कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं।

मेला क्षेत्र में 488 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा रही हैं

इसके अलावा, 30 पॉन्टून (अस्थायी) पुल बनाए जा रहे हैं और पूरे मेला क्षेत्र में 488 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा रही हैं। गंगा के पार दूसरी तरफ अखाड़ों के लिए जगह दी गई है। पवित्र स्नान की शुरुआत अखाड़ों के शाही स्नान से होती है। उस रास्ते को ठीक किया जा रहा है, जिससे होकर अखाड़ों के साधू-संन्यासी स्नान के लिए जाएँगे।

आवंटित भूमि पर पूरे विधि-विधान से अपनी धर्म ध्वजा स्थापित की

शनिवार को तीन प्रमुख संन्यासी अखाड़ों—श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, और अग्नि अखाड़ा—ने प्रशासन द्वारा आवंटित भूमि पर पूरे विधि-विधान से अपनी धर्म ध्वजा स्थापित कर दी। इन अखाड़ों के साधु-संतों ने अपने-अपने इष्ट देवताओं का आवाहन कर महाकुंभ क्षेत्र में अपनी आध्यात्मिक उपस्थिति दर्ज कराई।

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की तैयारी

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरी का कहना है कि तीनों संन्यासी अखाड़ों की परंपराएं समान हैं, लेकिन उनके इष्ट देवता अलग होने के कारण धर्म ध्वजा स्थापना अलग-अलग तिथियों में की जाती है। धर्म ध्वजा स्थापित होने के बाद अब अखाड़ों की छावनी निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा।

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“पेशवाई के बजाय “छावनी प्रवेश नाम दिया गया

छावनी बनने के बाद अखाड़े अपनी पारंपरिक पेशवाई निकालते हुए इन छावनियों में प्रवेश करेंगे। हालांकि, इस बार इसे “पेशवाई” के बजाय “छावनी प्रवेश” नाम दिया गया है। छावनी प्रवेश के बाद साधु-संत इन शिविरों में रहेंगे और संगम क्षेत्र में जप-तप, साधना, और आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करेंगे।

 तीन प्रमुख स्नान होंगे

महाकुंभ के तीन प्रमुख स्नान—मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, और वसंत पंचमी—पर साधु-संत शाही स्नान करेंगे। लेकिन इस बार शाही स्नान को “राजसी स्नान” या “अमृत स्नान” का नाम दिया गया है।

संगम की पवित्र रेती पर साधु-संतों के तप, ध्यान, और आध्यात्मिक साधना के विविध रूप इस महाकुंभ को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव में परिवर्तित करेंगे। इस दिव्य आयोजन की तैयारी और महत्ता, आस्था और संस्कृति के इस आयोजन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह से समर्पित है।

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