रायगड न्यूज | मेटपाडा, अलिबाग
रिपोर्टर: धम्मशील सावंत
रात 12 बजे के बाद होलिका दहन, कोळी समाज के लोगों में उत्साह चरम पर
अलिबाग के मेटपाडा कोळी वाडा में हर साल होली का उत्सव एक अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। इस अवसर पर गांव में चारों ओर आकर्षक सजावट की जाती है, जिससे पूरा वातावरण रंग-बिरंगा और उल्लासमय हो जाता है। कोळी समाज के लोग परंपरागत तरीके से इस त्योहार को मनाने के लिए एकत्र होते हैं, जहां होलिका दहन के बाद नृत्य, गीत और हर्षोल्लास का अनोखा नज़ारा देखने को मिलता है।
आकर्षक सजावट से महकता गांव
होली के दिन मेटपाडा कोळी वाडा एक अलग ही रंग में रंगा नजर आता है। गांव के हर घर को सुंदर रंगों, झालरों और रोशनी से सजाया जाता है। होली की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं, जहां युवा और बुजुर्ग मिलकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में योगदान देते हैं।
रात 12 बजे के बाद होलिका दहन
गांव में रात 12 बजे के बाद होलिका दहन की परंपरा है। इस दौरान पूरा गांव एकत्रित होता है और होलिका को अग्नि समर्पित करने की रस्म अदा की जाती है। होलिका दहन के बाद यहां का माहौल पूरी तरह से उत्साह से भर जाता है। कोळी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-ताशों की गूंज के साथ नृत्य करते हैं और लोकगीत गाते हैं।
महिलाओं की विशेष भागीदारी
इस अनोखी होली की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। गांव की महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और होलिका के चारों ओर नृत्य करती हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो इस त्योहार को और भी खास बना देती है।
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सामूहिक सौहार्द्र और परंपराओं का संगम
अलिबाग का मेटपाडा कोळी वाडा अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सौहार्द्र के लिए प्रसिद्ध है। होली यहां सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं को निभाने का भी प्रतीक है। गांव के सभी लोग मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं, जिससे समाज में आपसी भाईचारा और प्रेम बना रहता है।
त्योहार की खुशियों में डूबा मेटपाडा
होली के इस अनोखे अंदाज को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग यहां आते हैं। रंगों, गीतों और नृत्य से सराबोर यह उत्सव मेटपाडा कोळी वाडा को अलग पहचान देता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा हर साल और भी भव्य रूप लेती जा रही है, जिससे यहां की होली पूरे रायगड जिले में प्रसिद्ध हो चुकी है।











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