NewsFirst24.in

खबर वही, जो छुपाई जा रही है

VC सुभाष चौधरी: लगातार दबाव झेल रहे थे, चंदा कर अस्पताल का बिल चुकाया

सुभाष चौधरी

Exclusive. Newsfirst24.in

Published: October 30, 2024, 12:31 AM`

Nagpur vice chancellor subhash chaudhary death mystery

डॉ. सुभाष चौधरी

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलगुरू डॉ. सुभाष चौधरी पर लगातार करोड़ों के घोटाले में शामिल होने के आरोप लगे। हालांकि जब वह बीमार हुए और 25 सितंबर को उनका निधन हो गया उस समय उनके और परिवार के पास इलाज करवाने तक के पैसे नहीं थे। उनके साथी प्रोफेसर और कर्मचारियों ने चंदा कर अस्पताल का बिल भुगतान किया।

वे लगातार दबाव में थे, मगर किसी को बताया नहीं

NewsFirst24.in को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार डॉ. सुभाष चौधरी कुछ महीनों से भयंकर दबाव में थे। उन पर प्रेशर था कि वह यूनिवर्सिटी में होने वाली नियुक्तियों की एक ऐसी सूची पर साइन करें जिनके नाम पहले से मैनेज थे। इसके लिए उन्हें पहले मुंबई में सरकार के आला पदों पर बैठे लोगों ने बुलाया और फिर उन्हें इसमें सहमति देने को कहा।

यह भी पढ़ें-

डायरी ऑफ़ होम मिनिस्टर : “फडणवीस ने कहा- ED के कुछ अधिकारी आएंगे कुछ सवाल पूछेंगे और मामले को रफा दफा कर देंगे”

डॉ. चौधरी पर यह आरोप लगे थे

नागपुर विवि के पूर्व कुलगुरू डॉ. सुभाष चौधरी के खिलाफ शिकायतों की जांच कर अजीत बाविस्कर की समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि डॉ. चौधरी ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। एमकेसीएल को लेकर सरकार के आदेशों की अनदेखी की। एमकेसीएल को करोड़ों का फायदा पहुंचा गया। महाराष्ट्र नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमकेसीएल) को परीक्षा कार्य के लिए चुना गया था मगर  कांट्रेक्ट गैर-निविदा वालों को दिया गया।

दबाव में थे इसलिए बात करना ही बंद कर दी थी

डॉ. सुभाष चौधरी  के नजदीकियों ने बताया कि उनपर इतना दबाव था कि उन्होंने अपने आस-पास के लोगों से बात करना तक बंद कर दिया था। उन्हें आए दिन दबाव के लिए फोन आते थे। इसलिए उन्होंने फोन उठाना तक बंद कर दिए।

nagpur University in x

हाई कोर्ट ने निलंबन को गलत बताया था

21 फरवरी 2024 को राज्यपाल ने डॉ. सुभाष चौधरी  को पहली बार निलंबित किया था। वे इसके खिलाफ हाई कोर्ट गए। कोर्ट ने डॉ. सुभाष चौधरी निलंबन को गलत बताते हुए फैसला रद्द किया था। इसके चलते 11 अप्रैल को डॉ. चौधरी ने नागपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु का फिर से कार्यभार संभाला। लेकिन कार्यभार संभालते ही डॉ. चौधरी पर जांच बैठाई गई। राज्यपाल ने 4 जुलाई को डॉ. चौधरी को दूसरी बार फिर निलंबित किया था। इस मामले में कार्रवाई शुरू थी। इस दौरान उनका अचानक निधन हो गया।

उनसे कहा गया सहमति देने पर सारे आरोप वापस ले लिए जाएंगे

डॉ. सुभाष चौधरी को मुंबई में बैठे एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने नागपुर की एक अन्य यूनिवर्सिटी के काउंसिल मेंबर को उनके पास संदेश लेकर भेजा था। जिसमें कहा गया था कि यदि वे नियुक्ति सहित यूनवर्सिटी के कुछ ठेकों पर सहमति दे देते हैं तो उन पर लगे सभी आरोपों को वापस ले लिया जाएगा। उनकी जांच में बंद हो जाएगी। हालांकि उन्होंने इससे इनकार कर दिया था।

यह हआ था-
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया

महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कुलगुरु डॉ. चाैधरी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसलिए राज्यपाल रमेश बैस ने नये से रिपोर्ट दायर करने का आदेश दिया था। इस रिपोर्ट के बाद राज्यपाल ने कुलगुरु डॉ. चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की है।

एमकेसीएल को ठेका देने पर जिम्मेदार ठहराया

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एमकेसीएल के साथ विद्यापीठ द्वारा किया गया समझौता 2015 में रद्द कर दिया गया था। सितंबर 2017 में राज्य सरकार ने विद्यापीठ को पत्र भेजकर सीधे एमकेसीएल को कोई काम नहीं देने को कहा था। इसके बावजूद सरकार के फैसले की अनदेखी कर एमकेसीएल को ठेका देने के लिए विद्यापीठ को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके बाद डॉ. सुभाष चौधरी इस रिपोर्ट और जांच के खिलाफ अंत लड़ते रहे। वह इसे गलत और एकतरफा लिया गया निर्णय बता रहे थे, उन्होंने इसे हाई कोर्ट में चैलेंज भी किया। यही लड़ाई अंतिम स्टेज तक पहुंची इसके पहले उनका अचानक से निधन हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *