By Arvind Jadhav, Newsfirst24.in
Published: December 08, 2025, 11:49 PM
Vadhavan port will be the developed “fourth city” of Maharashtra
दुनिया के बड़े 10 बंदरगाह में होगी इसकी तुलना

मुंबई : सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए पालघर जिले में स्थित बंदरगाह को “चौथा शहर” के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
हाल ही तीसरा शहर के लिए मुंबई से सटे रायगढ़ जिले के 127 गांव में निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है अब वधावन बंदरगाह चौथा शहर के रूप में जल्द ही उबर सकता है।
अरबी सागर के पश्चिमी तट पर यह बंदरगाह दुनिया के 10 बड़े बंदरगाह में एक बड़ा बंदरगाह करने की इच्छा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताई है। इस बंदरगाह की निर्माण को लेकर काफी विवाद थे मछुआरों ने इसका पुरजोर विरोध किया था और यह बंदरगाह चार दशक से ज्यादा अनुमति की आस में था।
12 लाख रोजगार निर्मित करेगी यह परियोजना

पालघर जिले में मौजूद अरबी सागर व्यावसायिक दृष्टिकोण से देश के कई राज्यों के लिए उपयुक्त हो सकता है इसमें बड़े पैमाने पर समुद्री व्यापार को बढ़ावा दिया जाने वाला है यह परियोजना समुद्र में 1448 हेक्टेयर क्षेत्र पर प्रस्तावित है।
10.14 कि. मि. अपतटीय हिस्सा कंटेनर कार्गो भंडारण क्षेत्र के लिए शामिल है यह परियोजना हर वर्ष 298 मिलियन मेट्रिक टन की संचयन क्षमता से लैस होगा जिसमें 23.2 मिलियन कंटेनर का व्यापार अपेक्षित है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार वित्तीय सहयोग करने वाली है। नए साल की शुरुआती पर महाराष्ट्र के लिए पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने इसे मंजूरी देखकर एक तोहफा दिया है इस बंदरगाह में गरीब 12 लाख रोजगार निर्मित होने वाले हैं।
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76,220 करोड़ की परियोजना का 2034 तक होगा निर्माण
देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने वाला यह बंदरगाह को बुलेट ट्रेन समुद्र सेतु और हवाई अड्डा जैसे सुविधाएं प्रदान करने पर मुख्यमंत्री ने जोर दिया। यह बंदरगाह को विकसित करने के लिए 76. 220 करोड रुपए की लागत की आवश्यकता होगी इस बंदरगाह मैं नव कंटेनर टर्मिनल होंगे साथ ही 1 हजार मीटर मैं चार बहुउद्देशीय कार्य की तर्ज पर इसकी रचना की जाएगी।
गौरतलब है कि पिछले साल ही केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी है साथ ही महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर रेल सड़कें और समुद्री निर्माण का कार्य शुरू है सोमवार को उच्च स्तरीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री नहीं से युद्ध स्तर पर शुरू करने पर जोर दिया है। इस परियोजना का निर्माण अवधि 2034 तक है।











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