By Arvind Jadhav, Newsfirst24.in
Published: December07 , 2024, 09:27 AM
हाथ के बदले साथ का समीकरण मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए सेट हुआ ?

Why did Devendra Fadnavis remember Raj Thackeray after the elections, the sound of a new equation
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर राज ठाकरे की याद आ गई। एक नए इंटरव्यू में मनसे को सरकार और आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में साथ लेने की इच्छा जताई है।
देवेंद्र फडणवीस के इस नए बयान से महायुति और महाविकास आघाड़ी में हलचल मच गई है। राज्य में महानगर पालिका चुनावों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
हर पार्टी देश में सबसे ज्यादा राजस्व कमाने वाली मुंबई महानगरपालिका पर अपनी सत्ता चाहती है। देवेंद्र फड़णविस के इस बयान से मनसे को राज्य सरकार में मंत्रीपद के तौर पर फायदा होने का अंदाज लगाया जा रहा है और इस के बदले मुंबई महानगरपालिका में भाजपा को मनसे की मदद होने के आसार नजर आ रहे हैं।
मुंबई महानगरपालिका पर उद्धव ठाकरे की पकड़ कमजोर करना चाहते हैं

मुंबई महानगरपालिका में लगातार उद्धव ठाकरे शिवसेना गुट की सत्ता रही है। २०१७ के महानगरपालिका चुनाव में कुल २२७ पार्षद में उद्धव ठाकरे शिवसेना गुट के ८४ पार्षद चुनकर आए थे।
वर्तमान में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को मुंबई शहर की लोकसभा और विधानसभा में अच्छी सफलता मिलने से यह साफ जाहिर है कि मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना अब भी मजबूत स्थिति में है।
लेकिन अब लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव में भूली गई मनसे की तरफ वापस दोस्ती का हाथ बढ़ाकर भाजपा और देवेंद्र फड़णविस उद्धव ठाकरे की शिवसेना को मुंबई महानगरपालिका के सत्ता से बाहर करने की कोशिश तो नहीं न कर रहे हैं ऐसी चर्चा अब महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही है।
भाजपा भूल गई लोकसभा में साथ देनेवाले राज ठाकरे को विधानसभा में

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, सीटों के आवंटन को लेकर महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच बड़ा विवाद के चलते दोनों गठबंधन के लिए नए घटक पार्टी को शामिल करना मुश्किल था।
इसलिए, कई छोटे दलों ने अपने दम पर स्वतंत्र चुनाव लड़ा, इसमें मुख्य रूप से मनसे शामिल है। लोकसभा चुनावों में भाजपा को सहयोग के चलते मनसे ने महायुति में शामिल होने को लेकर अंत तक सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार किया।
आखिरकार मनसे ने विधानसभा चुनाव में अमित ठाकरे सहित 135 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन खराब रहने से पार्टी की मान्यता और प्रतीक के बारे में चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि मनसे को एग्जिट पोल से पांच-छह सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि खुद राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे के साथ पिछली विधानसभा में एकमात्र मनसे विधायक को भी हार का सामना करना पड़ा।
सद्भावना का खेल करेगा मनसे का महायुति में मेल
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अविश्वसनीय ऐसे एक शब्द राज ठाकरे की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक क्षेत्र में काफी चर्चा हुई। हालही में आमंत्रित किए जाने के बावजूद राज ठाकरे की नाराजगी छिपी नहीं थी क्योंकि वह शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए।
लेकिन कल शाम राज ठाकरे ने अपने एक्स पर पोस्ट किया और देवेंद्र फडणवीस के प्रति अपनी सद्भावना जताई। उन्होंने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया है कि देवेंद्र फड़णविस 2019 और 2022 में मुख्यमंत्री पद के अवसर से चूक गए। राज ठाकरे की पोस्ट के बाद आज देवेंद्र फडणवीस ने राज ठाकरे की पार्टी के प्रति अपनी सद्भावना व्यक्त की है।
राज ठाकरे का खुद को नुकसान और किसको हुआ फायदा ?
भले ही विधानसभा चुनाव में महायुति सरकार को अभूतपूर्व बहुमत मिला, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करने में 12 दिन लग गए। इससे अभी तक महायुति में सब खुशहाल जैसा नहीं लग रहा है। एकनाथ शिंदे की मानसिकता शिवसेना और मुंबई महानगरपालिका की सत्ता के समीकरण को कायम बनाए रखने की है इसलिए एकनाथ शिंदे भी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में अधिक सीटें मांग सकते हैं।
विधानसभा चुनाव में मनसे का महायुती में शामिल को लेकर पर्दे के पीछे से एकनाथ शिंदे की शिवसेना विरोध किया था। भाजपा के अनुरोध बावजूद भी राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपना उम्मीदवार वापस नहीं लिया। परिणामस्वरूप अमित ठाकरे की हार हुई लेकिन मनसे की वजह से उद्धव ठाकरे का उम्मीदवार यहां से जीता इसके अलावा मनसे की वजह से मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को आठ से दस सीटों का फायदा हुआ और उसके उम्मीदवार जीत गए।
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सद्भावना का फायदा महायुती या राज ठाकरे को होगा
राज ठाकरे का हमेशा फायदा होनेवाले महायुति को इस विधानसभा में उद्धव ठाकरे शिवसेना को फायदा हुआ अब यह सवाल है कि क्या मुंबई महानगरपालिका चुनाव में मनसे द्वारा संभावित डैमेज कंट्रोल को रोकने के लिए देवेंद्र फडणवीस की कोई चाल तो नहीं है।
दूसरी तरफ राजनीतिक क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि देवेंद्र फड़णविस मनसे के प्रति सद्भावना दिखाते हुए मुंबई महानगरपालिका चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, राज ठाकरे इस सद्भावना का किस तरह फायदा उठाते हैं, यह देखना होगा। राज ठाकरे, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की दोस्ती का फायदा उठाकर पार्टी को चुनाव आयोग की कानूनी मुसीबत से बाहर निकालेंगे क्या ?
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