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नए कानून समझ गए तो तत्काल मिलेगा न्याय, जाने नए कानूनों में कौन से बड़े अधिकार मिले हैं

देश की जानी-मानी एडवोकेट शशि मिश्रा बता रही हैं नए कानूनों में क्या बदलाव हुए हैं और आपको उसका कैसे फायदा मिलेगा

जुलाई  से तीन नए आपराधिक कानून लागू हुए हैं, जो महिलाओं को और सशक्त बनाते हैं। उन्हें नए अधिकार देते हैं। यदि आप उन्हें समझ जाते हैं तो आपको न्याय के लिए भटना नहीं पड़ेगा। देश की जानी-मानी एडवोकेट शशि मिश्रा बता रही हैं नए कानूनों में क्या बदलाव हुए हैं और आपको उसका कैसे फायदा मिलेगा। जुलाई 2024 से तीन नए आपराधिक कानून लागू हुए हैं। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता। अब आपराधिक मामलों का फैसला इन कानूनों से होगा

यह बदलाव आपको विशेष अधिकार देते हैं-

  1. नए कानून के मुताबिक, आपराधिक मामलों में सुनवाई समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर फैसला आएगा। पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएंगे। सभी राज्य सरकारों को गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के लिए गवाह सुरक्षा योजनाएं लागू करना होगा।

  2. बलात्कार पीड़िताओं के बयान महिला पुलिस अधिकारी की ओर से पीड़िता के अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज किए जाएंगे। मेडिकल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।

  3. कानून में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बच्चे को खरीदना या बेचना एक जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

  4. नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

  5. नए कानून में अब उन मामलों के लिए सजा का प्रावधान शामिल है, जिसके तहत महिलाओं को शादी का झूठा वादा करके या गुमराह करके छोड़ दिया जाता है।

  6. इसके अलावा नए कानून में महिलाओं के खिलाफ अपराध के पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर अपने मामलों पर नियमित अपडेट प्राप्त करने का अधिकार होगा। सभी अस्पतालों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराध के मामले में मुफ्त इलाज करना जरूरी होगा।

  7. आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट, बयान, इकबालिया बयान और अन्य दस्तावेजों की कॉपी प्राप्त करने का अधिकार है।

  8. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से घटनाओं की रिपोर्ट की जा सकेगी, जिससे पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत समाप्त हो सकेगी। साथ ही व्यक्ति FIR को अपने अधिकार क्षेत्र वाले थाने के बजाए भी दर्ज करा सकता है।

  9. अब गंभीर अपराधों के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों का घटनास्थल पर जाना और साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य होगा।

  10. लिंग की परिभाषा में अब ट्रांसजेंडर लोग भी शामिल होंगे, जो समानता को बढ़ावा देता है। महिलाओं के खिलाफ कुछ अपराधों के लिए जब भी संभव हो, पीड़ित के बयान महिला मजिस्ट्रेट की ओर से ही दर्ज किए जाने का प्रावधान है।

किसी भी थाने में दर्ज हो सकता है मुकदमा

अब किसी भी घटनास्थल का मुकदमा किसी भी थाने में दर्ज हो सकेगा, ऑनलाइन-व्हाट्सएप के जरिये भेजी शिकायत पर दर्ज करनी होगी रिपोर्ट, महिला और बाल अपराध में दो माह में करनी होगी विवेचना पूर्ण, जेल जाने के 40 दिन के अंदर पीसीआर लेने की सुविधा तय, गवाह या वादी को व्हाट्सएप पर ही समन-वारंट भेजा जाना मान्य, हर घटना की जांच में वीडियो फुटेज-वैज्ञानिक साक्ष्य पहले दिन से करने होंगे तैयार, केस डायरी में भी शामिल होंगे। इसके अलावा घटनास्थल, बरामदगी, पब्लिक की गवाही, वादी की गवाही, पीसीआर पर बरामदगी के वीडियो फुटेज बनाने होंगे।

पीछा करने पर भी सख्त सजा मिलेगी

नए कानून में क्या- धारा 77 के मुताबिक महिला का पीछा करने, मना करने के बावजूद बात करने की कोशिश, ईमेल या किसी दूसरे इंटरनेट संचार पर नजर रखने जैसे अपराधों को इसमें परिभाषित किया गया है, जिसमें सख्त सज़ा का प्रावधान है।

 

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