By ARVIND JADHAV, Newsfirst24.in
Published: November , 2024, 04:47 PM
मुंबई : मनसे प्रमुख राज ठाकरे लोकसभा चुनाव में भाजपा महागठबंधन के लिए काफी फायदेमंद साबित हुए। भाजपा के राष्ट्रीय नेता एवं वरिष्ठ पत्रकार के साथ राज ठाकरे के आलोचक ने भी राज ठाकरे की प्रशंसा की है।
महाराष्ट्र का राजनैतिक माहौल देख राज ठाकरेने अकेले दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पूरे राज्य में अपने पुत्र अमित के सहित 135 उम्मीदवार मैदान मैं उतारे थे। कई सर्वे में राज ठाकरे की मनसे को कुछ सीटे मिलने का अनुमान भी लगाया जा रहा था और खुद राज ठाकरे भी भाजपा के साथ सत्ता में बैठने का दावा कर रहे थे लेकिन सब व्यर्थ हो गया पार्टी को करारी हार मिली।
राज ठाकरे के साथ राजकीय विशेषज्ञ मुंबई की कुछ सीटों पर जीत मिलने की आस लगाए हुए थे। इसमें खासकर मानखुर्द शिवाजीनगर सीट में मुस्लिम वोटों में बंटवारे कारण मनसे के सफलता के अनुमान लगाए जा रहे थे।
अबू आजमी ने चौथी जीत दर्ज कर गढ़ बरकरार रखा

महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। भाजपा महायुति ने आसानी से बहुमत हासिल कर भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कुल मिलाकर जहां कुछ जगहों पर कांटे की टक्कर नजर आ रही थी, वहीं कुछ जगहों पर भाजपा महागठबंधन के उम्मीदवार आसानी से जीते हैं।
इस बीच मुंबई की सबसे उलझन और सुर्खिया बटोरती मानखुर्द शिवाजीनगर से तीन बार विधायक रह चुके अबू आजमी ने जीत हासिल की है, यह उनकी चौथी जीत है।
ओवैसी की एमआयएम ने अबू आजमी को दी कड़ी टक्कर

दरअसल, मानखुर्द शिवाजीनगर विधानसभा समाजवादी पार्टी और अबू आजमी का गढ़ माना जाता है। यहां नवाब मलिक की उम्मीदवारी से रंग चढ़ा हुआ था लेकिन यहां ओवैसी की एमआयएम का जलवा देखने को मिला, बल्कि कुछ देर के लिए अबू आजमी के भी पसीने छूट गए। एमआयएम प्रत्याशी अतीक अहमद खान ने अबू आजमी को अंत तक तगड़ी टक्कर दी।
अबू आजमी ने ५४,७८० वोट हासिल कर १२,७५३ वोटों के अंतर से अपनी चौथी जीत दर्ज की, जबकि एमआयएम उम्मीदवार अतीक अहमद खान ४२,०४७ वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तीसरे स्थान पर शिवसेना शिंदे गुट के सुरेश पाटिल को ३५,२६३ वोट मिले।
दिलचस्प बात यह है कि जीत की होड़ में दावेदार रहे नवाब मलिक को १५,५०१ वोट से चौथे स्थान पर सिमटना पड़ा। पांचवे स्थान पर प्रकाश आंबेडकर की वंचित को १०४८९ वोट मिले। जीत की दावेदार मनसे यहां ५४१४ वोट हासिल कर छठे स्थान पर जा चुकी।
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राज ठाकरे के लिए ” प्रयोगशाला ” थी यह सीट

मानखुर्द शिवाजीनगर मुस्लिम बहुल विधानसभा जहां इतिहास में पहली बार बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोटों के विभाजन का फायदा देखते मनसेने यहां अपना उम्मीदवार खड़ा किया था।
राज ठाकरे ने भी इस सीट को जरूर एक उम्मीद के तौर पर देखा होगा लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि मनसे उम्मीदवार सीधे छठे स्थान पर कैसे पहुंच गया।
राज ठाकरे जाहिर सभाओं में कट्टर हिंदुत्व और मस्जिदों के आवाज मुद्दों को खुलकर उठाते थे। इसलिए, राजनीतिक विशेषज्ञोंने मानखुर्द शिवाजीनगर को मनसे के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में देखा और राज ठाकरे के कट्टर हिंदुत्व और मस्जिदों पर आवाज का मुद्दा यहां की सफलता की समग्र तस्वीर मानी थी।
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मुस्लिम वोटों सहित हिंदू वोटों का भी विभाजन

३.२३ हजार मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में ६३ फीसदी मुस्लिम और ३७ फीसदी हिंदू मतदाता हैं। कुल १,७४,५९४ मतदान में सभी मुस्लिम प्रत्याशियोंको १,२८,४५३ वोट मिले।
जबकि, शिवसेना शिंदे गुट के सुरेश पाटिल के साथ मनसे और अन्य हिंदू उम्मीदवार को ४६,१३१ वोट मिलनेसे यहां हिंदू वोट का भी बटवारा साफ दिखाई दे रहा है।
कॉग्रेस और शिवसेना उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन के चलते अबू आजमी और अजित पवार के राष्ट्रवादी के कारण नवाब मलिक के साथ १०४८९ वोट पाकर ५ वे स्थान पर रहे प्रकाश आंबेडकर के प्रत्याशी को हिंदू वोट मिले।
सबसे दिलचस्प बात है कि माहिम में अमित ठाकरे को खुलकर समर्थन देने वाली भाजपा के वोट किसे मिले ? क्योंकि, यहां गठबंधन से नवाब मलिक को भाजपा ने विरोध जताया था।
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“ब्ल्यू प्रिंट” की जगह चली “ग्रीन प्रिंट”

२००९ में यहां मनसे उम्मीदवार को २२ हजार वोट मिले थे। इस बार मनसे उम्मीदवार जगदीश खांडेकर, जो एक स्थानीय, पश्चिमी महाराष्ट्र और धनगर समुदाय से है जिनकी निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी तादाद है इनको सिर्फ ५४१४ वोट मिलने से मतदाताओं ने राज ठाकरे की मनसे को नापसंद किया है।
देशभर राज ठाकरे और अबू आज़मी अपनी कट्टर विचारधारा के लिए जाने जाते है। मराठी भाषा को लेकर सभागृह में मनसे विधायक और अबू आजमी के बीच हाथापाई हुई थी इसलिए सभागृह के बाहर भी मनसे और सपा के बीच मुकाबला होना तय था।
लेकिन सभी उपलब्धियां होने के बावजूद मनसे का मैदान से कोसों दूर जाना राज ठाकरे को सोच ने पर मजबूर किया होगा। राज ठाकरे के लिए यह चूनाच और चुनावी एजेंडा इसलिए महत्वपूर्ण था इस में पुत्र अपनी राजकीय जीवन शुरू करने वाले थे।
पार्टी के मुख्य प्रचारप्रमुख के तौर पर क्षेत्र में राज ठाकरे की सभा ना होने से दूसरी तरफ राज ठाकरे की तरह मुस्लिम समुदाय में क्रेज रखनेवाले ओवैसी बंधुओं कि एक सभा ने यहां माहौल बदल दिया।
एमआयएम को यहां जोरदार सफलता मिलने से हर तरफ मानखुर्द शिवाजीनगर में “ब्लू प्रिंट” की जगह “ग्रीन प्रिंट” चलने की चर्चा है।
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