बुलढाणा: कामगार मंत्री के जिले में सरकारी कामगार ऑफिस में ताले, अधिकारी और कर्मचारी नदारद — गरीब मजदूर दर-दर भटकने को मजबूर
By वसीम शेख अनवर, Newsfirst24.in
Published: march 08, 2025, 03:38 PM
बुलढाणा, 8 मार्च: महाराष्ट्र सरकार ने गरीब मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक जिले में सरकारी कामगार अधिकारी कार्यालय की स्थापना की है। इन कार्यालयों का उद्देश्य है कि गरीब मजदूरों का पंजीकरण हो, उनके बच्चों की पढ़ाई, शादी, स्वास्थ्य और परिवार के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ मिले। लेकिन बुलढाणा जिले के सरकारी कामगार कार्यालय में स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से नदारद रहते हैं, जिससे गरीब मजदूरों के हक का फायदा उन तक नहीं पहुंच रहा।
बड़ी विडंबना यह है कि बुलढाणा जिले के कामगार मंत्री खुद एडवोकेट आकाश फुंडकर हैं, लेकिन उनके ही जिले के सरकारी कामगार ऑफिस में लापरवाही का अंबार लगा है। जब न्यूज फर्स्ट के संवाददाता वसीम शेख अनवर ने इस ऑफिस की पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
कामगार ऑफिस में ताले लटके, अधिकारी और कर्मचारी गायब
बुलढाणा के सरकारी कामगार अधिकारी कार्यालय का हाल यह है कि रोजाना दर्जनों गरीब मजदूर सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए यहां दस्तक देते हैं। कई मजदूर अपने बच्चों के लिए शिक्षा अनुदान, शादी अनुदान, चिकित्सा योजना और अन्य सुविधाओं के लिए आवेदन देने आते हैं। लेकिन जब वे इस ऑफिस में पहुंचते हैं, तो गेट पर ताला लटका हुआ मिलता है।
न्यूज फर्स्ट के संवाददाता वसीम शेख अनवर जब मौके पर पहुंचे, तो देखा कि पूरा ऑफिस वीरान पड़ा था। ना कोई अधिकारी मौजूद था, ना कोई कर्मचारी। कई मजदूर अपनी अर्जियां और दस्तावेज हाथ में लिए सुबह से दरवाजे पर खड़े थे, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिल रहा था।
एक मजदूर महिला ने आंसुओं से भरी आंखों से कहा,
“मैं सुबह 10 बजे से यहां खड़ी हूं। मेरे बेटे की शादी के लिए सरकारी योजना के तहत मदद का फॉर्म जमा करने आई थी। लेकिन गेट पर ताला लगा है, कोई भी अधिकारी नहीं है। मैं क्या करूं?”
हर दिन सैकड़ों मजदूर लौट रहे खाली हाथ, कोई सुनवाई नहीं
पड़ताल के दौरान यह साफ हुआ कि यह स्थिति एक दिन की नहीं, बल्कि लगभग हर दिन ऐसी ही बनी रहती है। सुबह 10 बजे से 5 बजे तक ऑफिस के गेट पर ताला लटकता है और कोई भी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद नहीं होता।
गांव से आए मजदूरों के हाथ में आवेदन पत्र, बच्चों के शिक्षा प्रमाणपत्र और परिवार के दस्तावेज होते हैं, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। लेकिन हर बार उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है।
मजदूरों ने बताया कि,
“हम हर बार 20-30 किलोमीटर दूर से आते हैं। कभी बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुदान, कभी शादी के लिए सरकारी सहायता लेने आते हैं। लेकिन यहां हमेशा ताला लटका मिलता है। अधिकारी और कर्मचारी आते ही नहीं।”
कामगार मंत्री के जिले में ही उनके विभाग का हाल बेहाल
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बुलढाणा जिले के कामगार मंत्री खुद एडवोकेट आकाश फुंडकर हैं। राज्य सरकार ने उन्हें कामगार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी दी है ताकि वे मजदूरों के कल्याण के लिए काम करें। लेकिन विडंबना देखिए कि उनके ही जिले के सरकारी कामगार अधिकारी कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी नदारद हैं।
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इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि —
- जब मंत्री के जिले में ही उनके विभाग की यह हालत है, तो राज्य के अन्य जिलों में क्या स्थिति होगी?
- क्या मंत्री जी को इस लापरवाही की जानकारी है, या जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?
नियमित गैरहाजिरी से मजदूरों के हक का नुकसान
ऑफिस में अधिकारियों और कर्मचारियों के नदारद रहने के कारण गरीब मजदूरों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है।
- बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुदान राशि।
- शादी अनुदान योजना के लिए दी जाने वाली सहायता।
- स्वास्थ्य योजना के तहत मजदूरों के परिवार को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं।
- आपदा राहत अनुदान, विधवा मजदूर सहायता, मकान निर्माण सहायता।
ये सभी योजनाएं मजदूरों के हक की हैं, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी के अनुपस्थित रहने के कारण मजदूरों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।
मजदूरों का आरोप: अधिकारी खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं
पड़ताल के दौरान मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि जब कभी अधिकारी-कर्मचारी ऑफिस में आते हैं, तो वे केवल परिचित लोगों के काम करते हैं या पैसे लेकर फाइलों को पास करते हैं।
एक मजदूर ने गुस्से में कहा,
“यहां बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता। हमने कई बार अपनी बेटी की शादी के लिए फॉर्म भरा, लेकिन हर बार अधिकारी गायब रहते हैं। जब कभी मिलते हैं, तो 5,000-10,000 रुपए मांगते हैं। यह सरकारी योजना गरीबों के लिए है या दलालों के लिए?”
सरकार की योजनाएं कागजों में सिमट कर रह गईं
बुलढाणा के सरकारी कामगार कार्यालय में व्याप्त लापरवाही ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
- जो मजदूर शिक्षा सहायता के लिए आते हैं, वे निराश होकर लौट जाते हैं।
- शादी अनुदान के लिए आवेदन करने वाले मजदूरों को महीनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
- बीमार मजदूरों के लिए मिलने वाली स्वास्थ्य योजनाएं ठप पड़ी हैं।
यह सब तब हो रहा है, जब इस जिले के कामगार मंत्री खुद एडवोकेट आकाश फुंडकर हैं।
न्यूज फर्स्ट का सवाल: क्या मंत्री अपने ही जिले के हालात से अनजान हैं?
अब सवाल यह उठता है कि क्या कामगार मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर अपने ही जिले के कामगार कार्यालय की लापरवाही से अनजान हैं?
- अगर उन्हें जानकारी है, तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- अगर उन्हें जानकारी नहीं है, तो क्या वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
- क्या मजदूरों के हक को लूटने वाली इस लापरवाही पर कभी लगाम लगेगी?
न्यूज फर्स्ट की मांग: कामगार मंत्री दें जवाब, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो
न्यूज फर्स्ट अब कामगार मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर से यह सवाल करता है —
- आपके ही जिले के कामगार कार्यालय में मजदूरों के साथ ऐसा अन्याय क्यों हो रहा है?
- क्यों गरीब मजदूर महीनों तक दर-दर भटक रहे हैं और अधिकारी-कर्मचारी नदारद हैं?
- क्या आप इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे?
अगर जल्द से जल्द इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो न्यूज फर्स्ट इस मुद्दे को राज्यस्तरीय स्तर पर उठाएगा।
👉 अब देखना यह है कि कामगार मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर इस लापरवाही पर क्या जवाब देते हैं?
👉 क्या गरीब मजदूरों को उनका हक मिलेगा या यह विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना रहेगा?
✅ न्यूज फर्स्ट इस खबर पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
✅ जल्द ही इस मामले में कामगार मंत्री का पक्ष भी लिया जाएगा।
📰 न्यूज फर्स्ट — सच दिखाने का वादा।
🔥 गरीबों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। 💯











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