-पिछले एक साल से डिजिस्टल अरेस्ट(Digital Arrest ) से करीब 2000 करोड़ से अधिक की ठगी हुई
– कभी सीबीआई, ईडी, इनकमटैक्स जैसी एजेंसियों का डर दिखाकर ठगा जा रहा है
-फोन पर आने पर पुलिस या साइबर क्राइम को शिकायत करें
देखें डिजिटल अरेस्ट का लाइव वीडियो….
देशभर में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest ) कर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। कभी सीबीआई तो कभी कस्टम तो कभी ईडी तो कभी पुलिस के आला अधिकारी बनकर इस ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। करीब एक साल में 2000 करोड़ से अधिक की ठगी हुई है।
यह ठगी का एक नया तरीका है जिससे आम आदमी ही नहीं देश के ख्यात उद्योगपति, बड़े ऑफिसर यहां तक की जज भी शिकार बने हैं। यही कारण है कि रविवार को मन की बात में खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ रहे मामलों पर चिंता जताई और इससे सावधान रहने के लिए भी कहा। Newsfirst24.in यहां डिजिटल अरेस्ट (digital arrest ) से जुड़ी वह सभी जानकारी दे रहा है जिससे पढ़कर आप इससे बच सकते हैं। कैसे डिजिटल अरेस्ट किया जाता है उसका एक लाइव वीडियो भी आपको शेयर कर रहे हैं ताकि आप इस ठगी से बच सकें।

How to Avoid Digital Arrest
डिजिटल अरेस्ट में भारत दुनिया में 10वे स्थान पर है
2024 में ‘मैपिंग ग्लोबल जियोग्राफी ऑफ साइबर क्राइम विद द वर्ल्ड साइबर क्राइम इंडेक्स में भारत 10वे स्थान पर है। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में कहां कहां साइबर अपराध सबसे ज्यादा हो रहे हैं। लिस्ट में 15 देशों के नाम हैं। पहले नंबर पर रूस, यूक्रेन दूसरे तो तीसरे नंबर पर चीन को साइबर क्राइम का सबसे बड़ा गढ़ बताया गया। इसमें भारत दसवें नंबर पर हैं।
कैसे होती है डिजिटल अरेस्ट(digital arrest ) से ठगी पढ़ें 3 केस स्टडी
केस-1 प्रसिद्ध उद्योगपति ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट (digital arrest ) कर करीब 7 करोड़ रुपये की ठगी
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का नाटक कर वर्धमान समूह के चेयरमैन और पंजाब के प्रसिद्ध उद्योगपति ओसवाल से डिजिटल अरेस्ट (digital arrest ) कर करीब 7 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ठगों ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट की एक नकली ऑनलाइन सुनवाई में बुलाया और जेल भेजने की धमकी देकर उनसे यह रकम ट्रांसफर करवा ली।
केस-2 सीबीआई (CBI) अधिकारी बनकर व्यापारी से बात की
पलवल शहर के एक व्यापारी अनिल कुमार को साइबर ठगों ने पहले मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। बाद में सीबीआई अधिकारी बनकर व्यापारी से 88 लाख रुपये हड़प लिए। व्यापारी को मनी लॉन्ड्रिंग करने के बहाने अपने जाल में फंसाया। बदमाशों ने पीड़ित को माता-पिता सहित गिरफ्तार करने की धमकी भी दी।
केस-3.मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और ह्यूमन ट्रैफिकिंग (Human Trafficking)
रीना ढ़ेकाने ने वडोदरा चार घंटे तक खुद के ही घर में हाउस अरेस्ट कर मेंटली टॉर्चर किया गया। साइबर माफिया ने महिला के पति को गोली मारने की धमकी तक दी। सामने वाला व्यक्ति खुद को मुंबई साइबर क्राइम ईस्ट ब्रांच का IPS ऑफिसर राकेश कुमार बताता है। मुंबई से थाईलैंड पार्सल भेजने और महिला के अकाउंट से 6.8 मिलियन की मनी लॉन्ड्रिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के केस में सीबीआई द्वारा जांच की बात कहता है। इसके बाद महिला को धमकी देकर एक लाख रुपये अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेता है।
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पीएम ने डिजिटल अरेस्ट (digital arrest ) से बचने के लिए यह कहा
पीएम ने मन की बात का 115वां एपिसोड में डिजिटल अरेस्ट (digital arrest ) का भी जिक्र किया। पीएम ने बताया कि कैसे डिजिटल अरेस्ट के तहत फ्रॉड किया जा रहा है और लोगों की गाड़ी कमाई को लूटा जा रहा है। पीएम ने कहा कि ये लोग फोन पर ऐसा वातावरण बना देते हैं कि आप डर जाते हैं। ये लोग कहते हैं ये करो नहीं तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन ये सब फ्रॉड है। डिजिटल अरेस्ट पर PM बोले- फ्रॉड कॉल आने पर रुको, सोचो और फिर एक्शन लो। यही इससे बचने का मंत्र है।
व्हाट्सएप पर CBI, ED के नोटिस भेज रहे हैं
लोगों को विभिन्न नंबरों से सरकारी एजेंसियों के लोगो लगे व्हाट्सएप पर विभिन्न नंबरों से फोन आ रहे हैं। फोन करने वाले ने खुद को CBI, ED, कस्टम, इनकम टैक्स या नारकॉटिक्स अधिकारी बनकर पीड़ित व्यक्ति को कॉल करते हैं और फिर उन पर या उनके करीबियों पर कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हैं। साथ ही व्हाट्सएप पर सीबीआई, ईडी, कस्टम और आरबीआई जैसी संस्था के नोटिस भेज रहे हैं। इसके बाद स्कैमर इस मामले को निपटाने के लिए तुरंत वीडियो कॉल की मांग करता है और उन्हें कॉल या वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने के लिए डराते हैं।
यहां शिकायत करें
ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट से
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स्कैमर्स पीड़ितों को डराने-धमकाने हैं। ऐसे में तुरंत कोई प्रतिक्रिया देने से पहले शांति से सोचें और कोशिश करें कि संबंधित एजेंसियों के नंबरों पर फोन लगाकर कंफर्म करें।
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अगर कोई कानून प्रवर्तन एजेंसी से होने का दावा करता है, तो उनके वीडियो कॉल न करें और न ही किसी तरह का कोई मनी अमाउंट उन्हें ट्रांसफर करें।
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फोन या वीडियो कॉल पर अपनी कोई संवेदनशील व्यक्तिगत या फाइनेंशियल स्टेटस से जुड़ी जानकारी बिल्कुल भी शेयर न करें।
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सरकारी एजेंसियां व्हाट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करती इसलिए झांसे में नहीं आएं।
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ऐसे कॉल आने पर पुलिस या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) में इसकी शिकायत करें।















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