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देहदान कर पेश की मिसाल: मृत्यु के बाद शव राख में ना बदले, मेडिकल रिसर्च के लिए गोंदिया मेडिकल कॉलेज को किया दान

देहदान कर पेश की मिसाल: मृत्यु के बाद शव राख में ना बदले, मेडिकल रिसर्च के लिए गोंदिया मेडिकल कॉलेज को किया दान

गोंदिया। राधा स्वामी सत्संग ब्यास की बालाघाट शाखा की पाठी साहिबा, श्रीमती अंजू दिलीप कुमार पाठक (उम्र 57 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 26, सरस्वती नगर) का 13 मई की रात 9:30 बजे हृदयगति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया।

मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर को राख में बदलने के बजाय वह समाज और विज्ञान के हित में उपयोग हो—इस सोच के साथ उन्होंने मेडिकल रिसर्च हेतु देहदान का संकल्प पहले ही ले लिया था। उनके इस निर्णय में परिजनों ने भी पूर्ण सहमति दी। पति दिलीप कुमार तथा बेटियां शिखा और साक्षी ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

शुरुआत में पार्थिव शरीर को इंदौर या जबलपुर ले जाने की चर्चा हुई, लेकिन दूरी अधिक होने से यह संभव नहीं था। ऐसे में नेत्र-मित्र नरेश लालवानी से राकेश मंगलानी ने संपर्क किया और गोंदिया मेडिकल कॉलेज में देहदान की संभावना पर चर्चा की।

नेत्र-मित्र लालवानी के प्रयासों से गोंदिया मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. घोरपड़े एवं डॉ. रुखमोड़े का सहयोग प्राप्त हुआ। इसके बाद 14 मई 2025 की रात 2 बजे देहदान एवं नेत्रदान का पंजीकरण किया गया और परिवार ने स्वेच्छा से शव को रिसर्च हेतु कॉलेज को सौंप दिया।

कॉलेज प्रशासन ने इस सराहनीय पहल के लिए परिवार को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी सक्षम ग्रुप के प्रभाकर राव और नरेश लालवानी के प्रयासों से दो परिवारों ने देहदान किया है।

अब महिलाएं भी इस मुहिम में सक्रियता दिखा रही हैं। श्रीमती अंजू पाठक का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक बन गया है।

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