-जस्टिस संजीव खन्ना ने सोमवार को देश 51वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली, 13 मई, 2025 तक रहेगा कार्यकाल
By Delhi desk , Newsfirst24.in
Published: November 11 , 2024, 04:02 PM
CJI Sanjeev Khanna is known for his tough decisions, Indira Gandhi was upset with his uncle’s decision

Chief Justice of India जस्टिस संजीव खन्ना ने सोमवार को देश 51वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली है। उनका कार्यकाल 13 मई, 2025 तक रहेगा। वे अपने सख्त फैसलों को लेकर जाने जाते हैं।
जस्टिस संजीव खन्ना ने देश में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं जिनको लेकर उनकी एक सख्त छवि लोगों के बीच में बनी हुई है। उनके चाचा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एच आर खन्ना के आपातकाल के दौरान एक फैसले से इंदिरा गांधी इतनी नाराज हुईं कि उन्हें CJI नहीं बनने दिया। जबकि उनके जूनियर को CJI बना दिया था।
इस बात को लेकर खन्ना परिवार में हमेशा से मलाल रहा है। हालांकि आज उन्हीं के भतीजे जस्टिस खन्ना अपनी काबिलियत से CJI बने हैं। वे दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति देव राज खन्ना के बेटे हैं।
जस्टिस खन्ना कम समय में न्याय दिलाने के पक्षधर हैं

जस्टिस संजीव खन्ना 18 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे। वह कम समय में न्याय देने के पक्षधर रहे हैं। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले जस्टिस खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति देव राज खन्ना के बेटे और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एच आर खन्ना के भतीजे हैं। CJI संजीव खन्ना का कानूनी क्षेत्र में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है।
इस फैसले से इंदिरा गांधी हो गई थी नाराज
48 साल के वकील शिवकांत शुक्ला को जेल भेज दिया गया था। उन्हें बिना किसी मुकदमे के ही गिरफ्तार किया गया था। इसके खिलाफ वह जबलपुर हाई कोर्ट गए तो अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि जीवन के अधिकार से किसी को भी वंचित नहीं किया जा सकता।
फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो वहां 5 जजों की बेंच ने फैसला दिया, जिनमें से 4 जजों ने बहुमत से उच्च न्यायालय के फैसले को पलट दिया। लेकिन बेंच में शामिल एकमात्र जज एचआर खन्ना ने अलग फैसला दिया।
उन्होंने कहा था कि संविधान द्वारा दिए गए जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) से किसी को भी वंचित नहीं किया जा जस्टिस एचआर खन्ना की यह राय तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को बहुत बुरी लगी। इस कारण से चीफ जस्टिस बनने का पात्र होते हुए भी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया था और फिर उनसे जूनियर को मौका दिया गया।
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फैसले में क्या कहा था जस्टिस एचआर खन्ना ने
जस्टिस एचआर खन्ना ने कहा था कि संविधान द्वारा दिए गए जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) से किसी को भी वंचित नहीं किया जा सकता। इस आदेश के 42 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुट्टास्वामी केस 2017 में दोबारा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बहाल किया। कहा जाता है कि जस्टिस एचआर खन्ना की यह राय तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को इतनी नागवार गुजरी थी कि चीफ जस्टिस बनने का पात्र होते हुए भी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया था और फिर उनसे जूनियर को मौका दिया गया।
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जस्टिस संजीव खन्ना दिल्ली में पढ़ाई की थी
जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई, 1960 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की। न्यायमूर्ति खन्ना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
जस्टिस संजीव खन्ना 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के रूप में नामांकन कराया। यहां तीस हजारी परिसर में जिला अदालत में और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत की। आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में उनका कार्यकाल लंबा रहा।
जस्टिस संजीव खन्ना को 2004 में, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए स्थायी वकील (सिविल) के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति खन्ना दिल्ली उच्च न्यायालय में अतिरिक्त सरकारी अभियोजक और न्याय मित्र के रूप में कई आपराधिक मामलों में भी अदालत की सहायता की थी।
जस्टिस संजीव खन्ना इन फैसलों के लिए जाने जाते हैं
ईवीएम में हेरफेर की आशंका को गलत बताया
जस्टिस संजीव खन्ना उल्लेखनीय निर्णयों में से एक चुनावों में ईवीएम के उपयोग को बरकरार रखना है, जिसमें कहा गया है कि ये उपकरण सुरक्षित हैं और बूथ कब्जा करने और फर्जी मतदान की आशंका नहीं है। न्यायमूर्ति खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने 26 अप्रैल को ईवीएम में हेरफेर की आशंका को ‘‘निराधार’’ करार दिया और पुरानी मतपत्र प्रणाली पर वापस लौटने की मांग को खारिज कर दिया।
चुनावी बॉण्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया
जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने चुनावी बॉण्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया था। चुनावी बांड योजना देशभर में चर्चा का विषय बनी थी और इसको लेकर सरकार को भी घेरा जा रहा था। ऐसे में यह फैसला लेना न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को बढ़ाने वाला साबित हुआ।
अनुच्छेद 370 को निरस्त किया
जस्टिस संजीव खन्ना उस पांच न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा थे, जिसने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के 2019 के फैसले को बरकरार रखा था।
मुख्यमंत्री केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी
जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने ही पहली बार आबकारी नीति घोटाला मामलों में लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल को एक जून तक अंतरिम जमानत दी थी।















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