By वसीम शेख अनवर, Newsfirst24.in
Published: march 05, 2025, 04:24 PM
बुलढाणा | बिहार के बोधगया स्थित महाबोधी बुद्ध विहार को बौद्ध भिक्षुओं के अधिकार में देने की मांग को लेकर पूरे देश में जनआंदोलन चल रहा है। इसी कड़ी में, बुलढाणा जिले में बौद्ध समाज के लोगों ने मूक मोर्चा निकालकर अपनी आवाज बुलंद की और इस मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
जयस्तंभ चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकला शांतिपूर्ण मूक मोर्चा
यह मूक मोर्चा स्थानीय जयस्तंभ चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के पुरुष, महिलाएं और युवा अनुशासनबद्ध तरीके से इस आंदोलन में शामिल हुए। मोर्चे में भाग लेने वाले सभी लोगों ने बौद्ध धम्म के प्रति आस्था जताते हुए शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से अपनी मांगें प्रस्तुत कीं।
महाबोधी विहार पर बौद्ध भिक्षुओं का अधिकार क्यों जरूरी?
बौद्ध समाज के लोगों का कहना है कि महाबोधी बुद्ध विहार, जो भगवान बुद्ध से जुड़ा एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है, उसे पूर्ण रूप से बौद्ध भिक्षुओं के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए। यह स्थान पूरी दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए पवित्र तीर्थ स्थल है, लेकिन वर्तमान में इसका प्रशासनिक नियंत्रण बौद्ध भिक्षुओं के हाथों में नहीं है, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन
मूक मोर्चे के समापन पर बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि महाबोधी बुद्ध विहार का प्रशासन बौद्ध भिक्षुओं को सौंपा जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस मांग को लेकर देशभर में आंदोलन तेज हो रहा है, और सरकार को इस पर जल्द से जल्द उचित निर्णय लेना चाहिए।
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बौद्ध समाज की एकजुटता का प्रदर्शन
इस मोर्चे में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, अनुयायी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी ने एकमत से यह मांग दोहराई कि महाबोधी विहार को बौद्ध समाज के सुपुर्द किया जाए ताकि इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जा सके।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
मोर्चे में शामिल बौद्ध नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आगे और भी बड़े आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति और सरकार इस विषय को प्राथमिकता देते हुए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।











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