By धम्मशील सावंत
Published: march 08, 2025, 08:37 PM
रायगढ़, 8 मार्च: रायगढ़ जिले के अलीबाग तालुका के ताडवागले ग्राम पंचायत में जलजीवन मिशन योजना के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद गांव के लोगों को पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही है। गांव के कई हिस्सों में बड़ी-बड़ी पानी टंकियां बनाई गई हैं, लेकिन ग्रामीणों को अब भी पानी के लिए मीलों भटकना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने प्रशासन से योजना में हुई अनियमितता की जांच करने की मांग की है।
करोड़ों की पानी टंकी, लेकिन एक बूंद पानी नहीं
ताडवागले ग्राम पंचायत के अंतर्गत कोलघर, ताडवागले और आसपास के अन्य गांवों में वर्षों पहले जलजीवन मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर पानी टंकियों का निर्माण किया गया था। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इन टंकियों से ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का ठेका लेने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह योजना केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गई है।
पीढ़ियों से महिलाएं और छात्र झेल रहे हैं पानी की किल्लत
गांव में पानी का संकट कोई नया नहीं है। सालों से यहां के छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में गांव के कुएं और जलस्रोत सूख जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। महिलाओं को सिर पर बाल्टी रखकर मीलों पैदल चलना पड़ता है। गर्मी के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
स्थानीय निवासी गंगूबाई म्हात्रे ने बताया कि – “हमारे गांव में जलजीवन मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर पानी टंकी बनाई गई थी। लेकिन सालों से एक बूंद पानी तक हमें नहीं मिला। हम आज भी कुएं और हैंडपंप के सहारे जीने को मजबूर हैं। यह योजना केवल पोस्टर और बैनर तक ही सीमित रह गई है।”
छात्रों और महिलाओं की बढ़ी दुर्दशा, स्कूल जाने वाले बच्चे प्यासे लौटते हैं
गांव के कई छात्र स्कूल जाते समय पानी नहीं पी पाते, क्योंकि गांव में पानी की कोई सुविधा नहीं है। भीषण गर्मी में बच्चे बिना पानी के स्कूल जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द से जल्द इस योजना को लागू नहीं किया गया, तो गर्मियों के दिनों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय महिला शकुंतला पाटिल ने कहा कि – “हर साल सरकार नए-नए वादे करती है। जलजीवन मिशन योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर पानी टंकी बना दी, लेकिन उसमें एक बूंद पानी तक नहीं आता। हमारी महिलाएं आज भी सिर पर बाल्टी रखकर 2-3 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। यह योजना हमारे लिए केवल एक छलावा साबित हुई है।”
ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का मानना है कि जलजीवन मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपए का बजट मंजूर किया गया था, लेकिन ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यह योजना अब तक अधूरी और निष्क्रिय पड़ी हुई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस योजना के तहत किया गया काम पूरी तरह से घटिया और आधा-अधूरा है।
ग्रामीणों की मांग है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा इस योजना में हुई धांधली की तत्काल जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
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भीषण गर्मी में प्यास से बेहाल ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी
कोलघर और ताडवागले गांव के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांव को पानी नहीं मिला या जलजीवन मिशन योजना में हुई अनियमितताओं की जांच नहीं कराई गई, तो ग्रामीण जबरदस्त आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
गांव के सरपंच राजू पाटिल ने कहा कि – “हमने कई बार जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को पानी सप्लाई शुरू करने के लिए निवेदन दिया, लेकिन हर बार हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब हालात यह हैं कि भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि जलजीवन मिशन योजना को तुरंत चालू करे और दोषियों पर कार्रवाई करे।”
क्या है जलजीवन मिशन योजना?
बता दें कि जलजीवन मिशन योजना केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत हर घर में नल से स्वच्छ जल आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के लिए गांवों में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई गांवों में योजना की स्थिति बेहद खराब है।
ताडवागले और आसपास के गांवों में पानी टंकी तो बना दी गई, लेकिन आज तक उसमें पानी नहीं भरा गया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस योजना को अमल में लाया जाए, ताकि हर घर तक पानी पहुंच सके।
ग्रामीणों की मांग: अनियमितताओं की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो
ग्रामीणों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मांग की है कि –
- जलजीवन मिशन योजना के तहत बने टैंक से पानी की सप्लाई तुरंत शुरू की जाए।
- योजना के ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत की जांच हो।
- इस योजना के लिए स्वीकृत करोड़ों रुपये की सही स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- गांव में पानी की किल्लत खत्म कर हर घर तक पानी पहुंचाने की गारंटी दी जाए।
यदि जल्द ही गांव को पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो ग्रामीण बड़े आंदोलन करने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे धोखेबाज ठेकेदारों और प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
सरकार ने ‘हर घर जल’ का नारा दिया, लेकिन ताडवागले गांव आज भी प्यासा है। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीणों के साथ किए जा रहे अन्याय की कहानी भी बयां करती है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की आवाज कब तक सुनते हैं।











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