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कांग्रेस को बड़ा झटका, हर्षवर्धन सपकाल के गढ़ से नेताओं का पलायन, शिवसेना में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल

कांग्रेस को बड़ा झटका, हर्षवर्धन सपकाल के गढ़ से नेताओं का पलायन, शिवसेना में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल

By वसीम शेख अनवर
Published: march 09, 2025, 01:54PM

Big blow to Congress, leaders flee from Harshvardhan Sapkal’s stronghold, hundreds of workers join Shiv Sena

कांग्रेस को बड़ा झटका, हर्षवर्धन सपकाल के गढ़ से नेताओं का पलायन, शिवसेना में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिलबुलढाणा: महाराष्ट्र कांग्रेस के लिए बड़ा सियासी झटका सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के गृहनगर बुलढाणा से ही कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है। शिवसेना विधायक संजय गायकवाड ने कांग्रेस में सेंधमारी करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष विजय अंभोरे, बुलढाणा विधानसभा क्षेत्र के समन्वयक एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को शिवसेना में शामिल करा लिया।

कांग्रेस को दो बड़े झटके, हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व पर उठे सवाल

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही हर्षवर्धन सपकाल का विरोध उनके ही गढ़ बुलढाणा से शुरू हो गया था। पहले कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व जिलाध्यक्ष विजय अंभोरे ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया और अब शिवसेना विधायक संजय गायकवाड ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका करते हुए एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को शिवसेना में शामिल करा दिया।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पुराने और जमीनी नेता अब हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे खुलकर हर्षवर्धन सपकाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राजनीति का नया मोड़, विधायक संजय गायकवाड ने रची कांग्रेस में सेंध लगाने की रणनीति

कांग्रेस को बड़ा झटका, हर्षवर्धन सपकाल के गढ़ से नेताओं का पलायन, शिवसेना में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिलसूत्रों के मुताबिक, शिवसेना विधायक संजय गायकवाड ने पहले विजय अंभोरे को अपने पाले में किया और फिर एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को कांग्रेस से तोड़कर शिवसेना में शामिल करा लिया। मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिवसेना में प्रवेश किया।

कार्यक्रम के दौरान एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत ने मंच से खुलासा करते हुए कहा कि,

“कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही हर्षवर्धन सपकाल ने पुराने और निष्ठावान नेताओं को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। पार्टी में परिवारवाद और गुटबाजी चरम पर है। हमें अपमानित महसूस कराया जा रहा था। इसी कारण मैंने और मेरे साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को छोड़ने का निर्णय लिया।”

हर्षवर्धन सपकाल पर लगे गंभीर आरोप, कांग्रेस के भीतर मचा हड़कंप

एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे हर्षवर्धन सपकाल पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि,

“प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हर्षवर्धन सपकाल केवल अपने खास लोगों को बढ़ावा देने में लगे हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है। जिले के कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं की आवाज सुनी नहीं जा रही है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस के भीतर अब भाई-भतीजावाद और गुटबाजी हावी हो चुकी है। जिससे पार्टी लगातार कमजोर हो रही है और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।

कांग्रेस के लिए बड़ा झटका, शिवसेना ने मजबूत की पकड़

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका है। क्योंकि यह पलायन किसी सामान्य कार्यकर्ता का नहीं, बल्कि प्रदेश उपाध्यक्ष और जिलाध्यक्ष जैसे बड़े नेताओं का है। खास बात यह है कि यह सब कुछ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के होमटाउन बुलढाणा में हो रहा है, जो उनकी नेतृत्व क्षमता पर सीधे सवाल खड़ा करता है।

शिवसेना विधायक संजय गायकवाड ने इस अवसर को भुनाते हुए कहा कि,

“कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता अब खुद महसूस कर रहे हैं कि पार्टी में अब कुछ नहीं बचा है। हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस पूरी तरह डूब चुकी है। इसलिए हम उन सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हैं जो शिवसेना में आना चाहते हैं।”

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क्या कांग्रेस में और टूट होगी?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बुलढाणा से कांग्रेस का सफाया हो जाएगा? क्योंकि विजय अंभोरे और एडवोकेट गणेशसिंग राजपूत जैसे बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में और भी नेता कांग्रेस छोड़ सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर हर्षवर्धन सपकाल पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस हाईकमान भी असहज हो गया है। हालांकि अब तक हर्षवर्धन सपकाल ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन यह तय है कि शिवसेना ने बुलढाणा में कांग्रेस को तगड़ा झटका दे दिया है।

अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस इस झटके से उबर पाएगी या फिर यह टूट आगे भी जारी रहेगी?

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