दो दिन की बारिश ने बिगाड़ा खेल
बुलढाणा जिले में पिछले दो दिनों से जारी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। कृषि विभाग ने प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया है कि जिले के 166 गांवों में कुल 4182 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
इन चार तहसीलों में सबसे ज्यादा नुकसान
जिले की मोताला, नांदुरा, खामगांव और जलगांव जामोद तहसीलें सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाली तहसीलें हैं। इन क्षेत्रों में मक्का, गेहूं, ज्वारी, भुईमुंग और प्याज जैसी रबी फसलें बारिश से पूरी तरह खराब हो गई हैं। इसके अलावा संतरा, नींबू, केला और पपीता जैसे फलदार पेड़ भी तेज बारिश और हवा की चपेट में आकर जमीन पर गिर गए। यह नुकसान ऐसे समय में हुआ है जब किसान फसल को मंडियों में ले जाने की तैयारी कर रहे थे।
घरों को भी पहुंचा नुकसान
बारिश से न सिर्फ खेत, बल्कि किसानों के मकान भी प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में कच्चे मकान ढह गए और टीन की छतें तेज हवाओं में उड़ गईं। इससे ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी भी अस्त-व्यस्त हो गई है। नुकसान की वजह से किसान अब कर्ज, बीज और अगले सीजन की तैयारी को लेकर चिंतित हैं। कई किसानों का कहना है कि अगर जल्द आर्थिक मदद नहीं मिली, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
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राहत की मांग तेज
शिवसेना (उबाठा गट) की नेता जयश्री शेल्के ने प्रशासन से मांग की है कि बिना देरी किए तुरंत पंचनामा कराया जाए और किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि इस संकट में सरकार को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए और तात्कालिक राहत देनी चाहिए।
प्रशासन की तैयारी
जिला कृषि अधिकारी मनोज ढगे ने बताया कि नुकसान की प्राथमिक रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है और विस्तृत सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मदद पहुंचे।
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