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महायुति में शिंदे फूफा की स्थिति में: बीजेपी से कहा मांगे माने नहीं तो वह बाहर से ही समर्थन देंगे

महायुति में फूफा की स्थिति में आए एकनाथ शिंदे

By MUMBAI BUREAU

Published: November 30 , 2024, 03:24 PM

महायुति में शिंदे फूफा की स्थिति में: बीजेपी से कहा मांगे नहीं मानी तो वह बाहर से ही समर्थन देंगे

मुंबई। महायुति  में सीएम के चेहरे पर छिड़ा विवाद अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार में सीएम के ताशपोशी की पूरी तैयारी हो चुकी है पूरी बारात रेडी है मगर एकनाथ शिंदे अचानक से शादी में फूफा की स्थिति में आ गए।

उन्होंने बीजेपी आलाकमान के सामने कह दिया कि या तो उनकी मांगे माने नहीं तो उन्हें कुछ भी नहीं चाहिए वह केवल बाहर से समर्थन देंगे और रूठकर अपने गांव चले गए। अब उनको घर वालों की तरह पूरा बीजेपी परिवार मनाने में जुटा हुआ है।

इधर अमित शाह ने एक बार फिर महायुति के तीनों नेताओं को दिल्ली तलब किया ताकि इस विवाद का अंत हो सके। शुक्रवार को मुंबई में भी एकनाथ शिंदे गुट की बैठक होना थी मगर शिंदे की नाराजगी और गांव चले जाने के बाद वह भी नहीं हो पाई।

पहले सीएम पर अड़े थे

विधानसभा में चुनाव परिणाम के बाद महायुति में सबसे पहले एकनाथ शिंदे सीएम की कुर्सी के लिए अड़े रहे। जब कुछ दिनों के मान-मनौव्वल के बाद मामला सुलझा और वह सीएम की कुर्सी छोड़ने को राजी हुए तो फिर नई मांगों के साथ वह नई जिद पर अड़ गए।

 अब उन्हें गृह और वित्त जैसे विभाग चाहिए

महायुति में शिंदे फूफा की स्थिति में: बीजेपी से कहा मांगे नहीं मानी तो वह बाहर से ही समर्थन देंगे

एकनाथ शिंदे ने अब अपनी नई मांग बीजेपी आला कमान के सामने रख दी है कि उन्हें यदि सीएम नहीं बनाया जा रहा है तो कोई बात नहीं गृह और वित्त जैसे विभाग उनकी पार्टी के पास रहना चाहिए।

ऐसे में एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई। उन्हें बीजेपी आलाकमान द्वारा बार-बार समझाया गया मगर वह नहीं माने और आखिर में रूठकर अपने गांव चले गए।

बीजेपी का कहना है कि गृह विभाग उनके पास नहीं होगा तो पद का मतलब ही क्या है

पूरे मसले में बीजेपी भी गृह विभाग छोड़ने को तैयार नहीं है। उनका तर्क है कि यदि महाराष्ट्र में सीएम बनकर भी गृह और वित्त जैसा विभाग उनके पास नहीं होंगे तो सीएम के पद पर बैठने का मतलब ही क्या है। इससे अच्छा तो पिछली सरकार में ही सही थे। बावजूद इसके महायुति  में बीजेपी के पास 132 सीटों का सपोर्ट है। शिंदे यदि सरकार में शामिल भी नहीं हो तो भी उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।

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अजीत पवार गुट ने चुप्पी साधी, समझ नहीं आ रहा है क्या करें?

महायुति में शिंदे फूफा की स्थिति में: बीजेपी से कहा मांगे नहीं मानी तो वह बाहर से ही समर्थन देंगे

इस पूरे विवाद में महायुति  में शामिल अजीत पवार गुट ने चुप्पी साध ली है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वह किस स्थिति में है। जब सभी महत्वपूर्ण विभाग बीजेपी और एकनाथ शिंदे को चाहिए हैं तो वह क्या करेंगे? मगर वह बार्गेनिंग की स्थिति में भी नहीं है। इसलिए समझ नहीं पा रहे हैं आखिर करें तो क्या करें।

एकनाथ शिंदे गुट अपनी मांगों को लेकर मुखर हुआ

शिंदे गुट अपनी मांगों को लेकर अब सीधे तौर पर मुखर हुआ है। शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने ने कहा है कि महाराष्ट्र की नई सरकार में पार्टी को गृह विभाग मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।

शिंदे की सकारात्मक छवि और उनके द्वारा लाई गई योजनाओं को देखते हुए अगर उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ढाई साल और मिलते तो वह अधिक योगदान दे पाते। गृह विभाग शिवसेना के पास होना चाहिए। विभाग आमतौर पर उपमुख्यमंत्री के पास होता है। इसलिए यह सही नहीं होगा कि मुख्यमंत्री गृह विभाग का नेतृत्व करें।

महायुति में दरार 

अभी मौजूदा सरकार में गृह विभाग देवेंद्र फडणवीस के पास है। अब विभागों के बंटबारे को लेकर महायुति में दरार पड़ गई है तो साफ तौर से देखी जा सकती है। हालांकि बीजेपी के अलावा शिंदे और पवार गुट के पास बहुमत नहीं है कि अपने दम पर सरकार बना सकें। इसलिए वे खुलकर बोलने से बच रहे हैं।  

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र राज्य चुनावों में 288 विधानसभा सीटों में से 230 जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। भाजपा ने 132 सीटें, शिवसेना ने 57 सीटें और एनसीपी ने 41 सीटें जीती हैं।

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