नांदेड़ में दो दिनों में दो छात्र आत्महत्या मामला, शहर में हड़कंप
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में दो दिनों के भीतर दो अलग-अलग छात्र आत्महत्या मामला सामने आए हैं, जिसने शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ 10वीं में 73 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्रा ने कम अंक आने के कारण फांसी लगाकर जान दे दी, तो दूसरी ओर नर्सिंग कॉलेज के तीसरे वर्ष के छात्र ने कॉलेज प्रशासन की प्रताड़ना से तंग आकर गोदावरी नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली।
10वीं की छात्रा ने 73% अंक के बावजूद की आत्महत्या
14 मई को नांदेड़ के सांगवी इलाके के अंबा नगर में 10वीं की छात्रा रोशनी पगारे ने आत्महत्या कर ली। रोशनी ने हाल ही में 10वीं कक्षा की परीक्षा में 73.80 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, लेकिन वह 80-85% की अपेक्षा कर रही थी। इस निराशा में उसने पंखे से लटक कर जान दे दी।
परिजनों का कहना है कि रोशनी पढ़ाई में होशियार थी और उसे अच्छे अंक मिलने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन अपेक्षा से कम अंक आने पर वह अंदर से टूट गई। रोशनी के मामा रोहिदास सावते ने बताया, “वह बार-बार कह रही थी कि उसे 80 से कम अंक नहीं चाहिए थे। हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी।”
छात्र आत्महत्या मामला में नर्सिंग छात्र ने नदी में कूदकर दी जान
दूसरी घटना में 20 वर्षीय पुनीत विनोदराव वाटेकर, जो कि नांदेड़ के खुपसरवाड़ी स्थित मेमोरियल स्कूल ऑफ नर्सिंग में थर्ड ईयर का छात्र था, 12 मई से लापता था। उसका शव 15 मई को हासापुर के पास गोदावरी नदी में मिला।
परिवार वालों और सहपाठियों का आरोप है कि पुनीत पर कॉलेज प्रशासन की ओर से असाइनमेंट और कोर्स के दबाव में मानसिक प्रताड़ना की जा रही थी। पुनीत की बहन श्वेता और मां ने साफ तौर पर शिक्षक और प्रशासन पर आरोप लगाए हैं।
छात्रों ने शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया आंदोलन
इस छात्र आत्महत्या मामला में छात्रों ने वजीराबाद पुलिस स्टेशन और जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि कॉलेज के शिक्षक कोरे व्यापक ने पुनीत को बार-बार मानसिक रूप से परेशान किया। छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि दोषी शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
इस घटना पर नांदेड़ जिला कलेक्टर राहुल कर्डिले ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि इस छात्र आत्महत्या मामला की गहराई से जांच की जाएगी और दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।
रोशनी के मामा की भावुक अपील
रोशनी के मामा ने कहा, “10वीं अंतिम मुकाम नहीं है। कई लोग जो आज अफसर हैं, उन्होंने भी किसी समय कम अंक पाए थे या फेल हुए थे। मैं सभी छात्रों से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि जीवन में निराशा के क्षण आएं तो परिवार और शिक्षकों से बात करें, ना कि आत्मघाती कदम उठाएं।”
निष्कर्ष
यह छात्र आत्महत्या मामला समाज के सामने कई सवाल छोड़ जाता है – क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रही है? क्या हम उन्हें मानसिक रूप से इतना मजबूत बना पा रहे हैं कि वे असफलता को संभाल सकें? और सबसे महत्वपूर्ण – क्या हम बच्चों की बातें सुनने को तैयार हैं?
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