-कई गुटों के बड़े-बड़े उम्मीदवार मानखुर्द शिवाजी नगर सीट पर उतारे हैं
– सबकी नजर मुस्लिम वोटों पर, मगर उम्मीदवार इतने की सब कन्फ्यूज
By arvind jadhav
Newsfirst24.in
Published: November 08 , 2024, 03:47 PM
From Nawab Malik to Abbu Azmi, everyone’s reputation is at stake, what is going on in Mumbai’s high profile seat
मुंबई – इस बार मुंबई की सबसे हॉट विधानसभा सीट मानखुर्द शिवाजीनगर में सभी दल के प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है। यह विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक अबू आज़मी चौथी बार अपना नसीब आजमा रहे है। यह विधानसभा अबू आज़मी और समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है।
3.5 लाख मतदाता इस क्षेत्र में हैं

इस बार पूर्व मंत्री नवाब मलिक के मैदान में होने से इस सीट पर काफी रंगत आ गई है। हालांकि महाराष्ट्र में भाजपा शिवसेना और अजीत पवार का गठबंधन है लेकिन यहां अजीत पवार गुट से नवाब मलिक और शिवसेना शिंदे गुट से सुरेश पाटिल मैदान में होने से यहां गठबंधन अलग-अलग चुनाव लड़ रहा है। गौरतलब है कि करीब 3.5 लाख मतदाता इस क्षेत्र में है।
झुग्गियां का क्षेत्र माना जाता है
यह क्षेत्र झुग्गियां का क्षेत्र माना जाता है यहां मध्यम वर्गीय जनता का वास्तव्य है। क्षेत्र में जातीय समीकरण में यह मुस्लिम बहुल माना जाता है। इस बार हमेशा की तरह मुस्लिम समाज से कई अन्य उम्मीदवार भी मैदान में डटकर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी रखे हुए कारण यहां लगभग जाती समीकरण चलने की आशंका है।
मौजूदा समस्या सभी उम्मीदवारने अपना चुनाव मुद्दा बनाया
क्षेत्र की कई मौजूदा समस्या सभी उम्मीदवारने अपना चुनाव मुद्दा बनाया है। कई सारे मुस्लिम उम्मीदवार होने कारण इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटो में सेंधमारी होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं शिंदे गुट के उम्मीदवार सुरेश पाटिल के सामने राज ठाकरे की मनसे से जगदीश खांडेकर बतौर उम्मीदवार होने से उलझन बढ़ने से जातीय समीकरण का आकलन होना मुश्किल हो चुका है।
जनता ने तीन बार अबू आज़मी को पसंद किया

इस क्षेत्र की जनता ने तीन बार अबू आज़मी को पसंद किया है। अब महाविकास आघाड़ी के कार्यकर्ता के मेहनत के ऊपर बहुत सारी बातें निर्भर है। अबू आज़मी इस क्षेत्र से वाकिब है जाहिर सी बात है कि 15 साल वह इस क्षेत्र को अच्छी तरह जानते है। हर गली के वली से वह संबंध रखते है। दूसरी ओर जीत के समीकरण लगाए हुए नवाब मलिक को भी नजरअंदाज करना मुश्किल है।
हिन्दू बहुल क्षेत्र से विधायक और मंत्री रहे हैं नवाब मलिक
पड़ोसी हिन्दू बहुल क्षेत्र से विधायक और मंत्री रहे नवाब मलिक इस बार अपना राजकीय अस्तित्व दाँव पर लगाए हुए है इसके भी कई कारण हो सकते है। क्षेत्र से और एक मुस्लिम उम्मीदवार अतीक असुद्दीन ओवैसी के एमआईएम से खड़ा है यह भी चर्चा गल्ली गल्ली चल रही है। दूसरे और एक मुस्लिम उम्मीदवार मोहम्मद सिराज को भी एक खतरा के रूप में देखा जा रहा है। इस बार सभी उम्मीदवार को समुन्दर तैर के निकलना होगा क्योंकि अब मतदाता के पास कई विकल्प है। यह विकल्प इतिहास में पहली बार आए है।
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किस उम्मीदबार में कितना दम
अबू आज़मी : समाजवादी के कद्दावर नेता और क्षेत्र से 3बार विधायक होने से क्षेत्र से वाकिब है। मुस्लिम साथ ही उत्तर भारतीय मतदाता मैं अपनी एक अलग छबि बनाए हुए है। इस क्षेत्रमें बड़ी तादाद में उनके और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पार्षद आघाड़ी का फर्ज निभाते है तो यह इस बार भी अबू आज़मी सफल हो सकते है।
नवाब मलिक : महाराष्ट्र की राजनीति में कई बार मंत्री रह चुके नवाब मलिक इस बार पड़ोसी क्षेत्र से नसीब आजमा रहे है। महाराष्ट्र सरकार में कद्दावर मंत्री रहते हुए मुस्लिम समाज के साथ हिंदू समाज में एक खासा प्रभाव रखते है। उनकी दबंग और तगड़ी छबि में यहां नए समीकरण की चर्चा है।
सुरेश पाटिल : क्षेत्र की मतदाता में एक जाना पहचाना नाम है। पूर्व पार्षद होनेसे वह क्षेत्र के हिन्दू समुदाय के साथ मुस्लिम समाज में भी संबंध बनाए हुए है। इस बार शिंदे शिवसेना से नसीब आजमाते हुए तगड़ी लड़ाई के बीच एक उम्मीदवार के रूप में देखे जाते है।
जगदीश खांडेकर : यह पहली बार चुनाव लड़ रहे है राज ठाकरे की मनसे ने उन्हें यहां उतारा है। इस क्षेत्र में पहले चुनाव मैं मनसे ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। अब राजनीति में काफी बदलाव आ गए है। मराठी उम्मीदवार होने कारण और राज ठाकरे की मराठी जनता में छवि कारण इन्हें लॉटरी के रूप में देखा जा रहा है।
अतीक अहमद खान : यह शिवाजीनगर में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते है। क्षेत्र की समस्या को लेकर कई सारे सामाजिक आंदोलन उनके नेतृत्व हुए है। अब वह असुद्दीन ओवैसी के एमआयएम से खड़े है। पार्टी नेता अकबरुद्दीन ओवैसी की रैली के बाद यहां के समीकरण बदलने के अनुमान लगाए जा रहे है।
मोहम्मद सिराज : पहले निर्दलीय रूप में चुनाव लड़कर अपना मकाम दर्ज किए हुए मोहम्मद सिराज अब वंचित पार्टी से मैदान में है। यहां के दलित मतदाता में वंचित का अलग प्रभाव है साथ ही मोहम्मद सिराज के पिछली बार के वोट एकसाथ आ जाते है तो फिर गड़बड़ी हो सकती है।
इनके साथ और कहीं निर्दलीय उम्मीदवार भी खड़े हैं वह भी हजार की संख्या में वोट लेते हैं तो प्रमुख उम्मीदवार को इसका नुकसान होना तय है। इस सीट को काफी गंभीरता से लेते चुनाव प्रचार साथ जमीनी रणनीति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है । हर मतदाता हर गली को लुभाने का प्रयास जारी है। यहां किसी की भी जीत का अनुमान लगाना कठिन साबित हो रहा है। अलग अलग रणनीति से यह सीट निकालने का प्रयास कई पार्टी कर रही है।











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